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काबिल शायरी

Kabil shayari | काबिल शायरी | layak shayari

meri talaash

जब जब तुझे मेरी तलाश होगी
तब तब तेरी आँखे हताश होगी
meri talaash

ab wo phool

इश्क के गुल,थोडे इंतजार में नहीं खिलते
मंजिल पर खडे लोग,मझधार में नहीं मिलते
रूह तक में बस जाए खुशबू जिनकी
अब वो फूल बाजार में नहीं मिलते
ab wo phool

nhi the kabil

लो चल दिए हम ज़िन्दगी से शायद खत्म हो सके तेरी शिकायते हम ही नहीं थे काबिल जो निभाते मोहब्बते 

nhi the kabil

tere pyaar ke qabil

कैसे करे हम खुद को तेरे प्यार के काबिल 

जब हम आदते बदलते है तो तुम शर्ते बदल देते हो !!

tere pyaar ke qabil