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jazbaat shayari

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mujhe kya pta

mujhe kya pta

मुझे क्या पता यहा तुम से अच्छा है या नही 

तुमहारे सिवा किसी और को गौर से देखा ही नहीं

bhut roka mgar

bhut roka mgar

बहुत रोका मगर कहा तक रोकता 

मोहब्बत बढती गई तुमहारे नखरो की तरह 

kaise maan loo

kaise maan loo

मै ये  कैसे मन लू की कोई नहीं मेरा 

जब तक खुदा की जात है तनहा नहीं हूँ मै 

chahat mohabbat wfa

chahat mohabbat wfa

ना चाहत है ना मोहब्बत है ना इश्क है ना वफा 

जो कुछ भी  था मेरे पास वो सब तुमको दे दिया 

mere zindagi ka swal hai

mere zindagi ka swal hai

तेरी दिल फरेब अदाए मेरी जान ले सकती है 

अपना अंदाजे नज़र बदलो मेरी ज़िन्दगी का सवाल है