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जान शायरी

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tumhe chahne me

ख़ुदा जाने कौन सी कसर रह गई थी तुम्हे चाहने में.!
तुम जान ही नहीं पाई की मेरी जान हो तुम

khud hi mar jaaunga

खुद ही मर जाऊँगा मैं वक्त आने पे,
ऐ इश्क तू क्यूँ मेरी जान का दुश्मन बना हुआ है

intezar nahi karte

इशक के दरद ही कुछ ऐसे हैं…
लोग जान दे देते हैं मगर इंतजार नहीं करते

log smajhte hai

हम दोस्त बनाकर किसी को रुलाते नही..
दिल में बसाकर किसी को भुलाते नही..
हम तो दोस्त के लिए जान भी दे सकते हैं...
पर लोग सोचते हैं की हम दोस्ती निभाते नहीं

ksham de gya

हमने माँगा था साथ जिसका,
वो उम्र भर की जुदाई का गम दे गया,
हम जी लेते यादो के सहारे उसकी पर,
जाते जाते जालिम भुल जाने की कसम दे गया