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Intezaar Shayari

tera intzaar hai

tera intzaar hai

शाम कब की ढल चुकी है तेरे इन्तज़ार में

अब भी अगर आ जाओ तो ये रात बहुत है

teri mohabbat pe mera haq nahi

teri mohabbat pe mera haq nahi

तेरी मोहब्बत पे मेरा हक तो नहीं 

पर दिल चाहता है आखरी साँस तक तेरा इंतज़ार करू