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ghar ki zroorat

मै सो रहा था ओढ़ कर चादर नशीब की !

घर की जरूरतों ना अचानक जगा दिया !!

ghar ki zroorat

uncha uthna hai to

ऊँचा उठाना है तो अपने अन्दर के अहंकार को निकाल कर खुद को हल्का करो क्युकी ऊँचा वही उठता है जो हल्का होता है !!

uncha uthna hai to

kamiyab hone ke liae

कामयाब होने के लिए अकेले ही आगे बडना पड़ता है !

लोग तो पीछे तब आते है जब आप कामयाब होने लगेंगे !!

kamiyab hone ke liae

sfar dhoop ka kiya to tzurba huaa

हद ए शहर से निकली तो गावं गावं चली !

कुछ यादे मेरे संग पाव पाव चली !

सफर जो धुप का किया तो तजुर्बा हुआ !

वो ज़िन्दगी भी क्या जो छाव छाव चली !!

sfar dhoop ka kiya to tzurba huaa

zindagi tumse har kadam

ज़िन्दगी तुमसे हर कदम समझोता क्यों किया जाए !

शोक है जीने का मगर इतना भी नहीं की मर मर के जिया जाए !!

zindagi tumse har kadam