www.poetrytadka.com

Hindi Poetry

Khali kagaz

बहुत रोयी होगी वो खाली कागज देख कर !

खत में उसने पुछा था ज़िंदगी कैसी बीत रही है !!

Hindi poetry

जाने ये कैसा ज़हर दिलों में उतर गया !

परछाईं ज़िंदा रह गई इंसान मर गया !!

Dard

लोग कहते हैं आप,मुस्कुराते बहुत हैं !

हम परेशां हैं अपना,दर्द छुपाते छुपाते !!

Dhadkan

बहुत देर करदी तुमने मेरी धडकनें महसूस करने में !

वो दिल नीलाम हो गया जिस पर कभी हकुमत तुम्हारी थी !!

Tootne ki wazah

मेरे टुटने की वजह मेरे जौंहरी से पुछो !

उसी की जिद् थी कि मुझे थोड़ा और तराशा जाये !!