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बेहतरीन हिन्दी शायरी

बेहतरीन हिन्दी शायरी | Great shayari | बेहतरीन शेर

be khabar nahi

ये सोचना ग़लत है कि तुम पर नज़र नहीं
मसरूफ़ हम बहुत हैं मगर बे-ख़बर नहीं be khabar nahi

wo mujhe bhool raha hai

तन्हाई की दीवारो पे घुटन का पर्दा झूल रहा है...
बेबसी की छत के नीचे,कोई किसी को भूल रहा है wo mujhe bhool raha hai

adhuri reh jati hai

कुछ कहानियाँ अक्सर अधूरी रह जाती है,
कभी पन्ने कम प़ड़ जाते है तो कभी स्याही सूख जाती है adhuri reh jati hai

samajh nahi pai

मेरे दर्द से तो पत्थर तक पिघल जाये,
बस एक वो है जो ये समझ नहीं पाई samajh nahi pai

dil se chura leti hai

शाम होते ही तेरे प्यार की पागल खुशबु
नींद आँखों से, सुकून दिल से चुरा लेती है dil se chura leti hai