Dhoka Shayari

kaise dhokha kha baithe

अनजाने में यूँ ही हम दिल गँवा बैठे,

इस प्यार में कैसे धोखा खा बैठे,

उनसे क्या गिला करें.. भूल तो हमारी थी

जो बिना दिलवालों से ही दिल लगा बैठे

mujhe dhoka diya

तकलीफ ये नही की किस्मत ने मुझे धोखा दिया,

मेरा यकीन तुम पर था किस्मत पर नही

dhokha nahi mila

कौन है इस जहाँ मे जिसे धोखा नहीं मिला,

शायद वही है ईमानदार जिसे मौक़ा नहीं मिला.

dhoka deti hai

धोखा देती है शरीफ चेहरों की चमक अक्सर,

हर कांच का टूकड़ा हीरा नहीं होता

kahte hai pyar me dhokha

kahte hai pyar me dhokha

लोग कहते है प्यार मे धोखा मिलता है 

पर जो कहते है वो मेरे सनम को नही देखा

mohabbat me dhoka nahi hota

जब दो टूटे हुए दिल मिलते है, 

तब मोहब्बत में धोखा नहीं होता 

dhokha dil ke kareeb

देखा है जिदंगी में हमने ये आज़मा के

देते है यार धोख़ा दिल के करीब ला के

dhokha kahne ki

दिल तो पहली बार ही टूट गया था..

बाद में तो इसने जिद कर ली थी धोखा खाने की.

kabhi dhoka bhi deti hai

किसी की मजबूरी का मजाक ना बनाओ यारों

ज़िन्दगी कभी मौका देती है तो कभी धोखा भी देती है

dhokha to har kisi

धोखा तो हर किसी को मिलना चाहिए 

जीवन में एक बार वरना कुछ अधूरा सा लगता है