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Bewafa Shayari

Zamane ki bewafai

तू भी बेवफा निकला औरों की तरह, सोचा था !
की हम तुझसे ज़माने की बेवफाई का गिला करेंगे !!

Bewfa ki aasme

जुल्मो सितम सहते रहे एक बेवफा की आस मे !
डुबो दिया मुझे दरिया ने दो घूट की प्यास में !!

Charche bewfai ke

मैंने उस से वफ़ा की उम्मीद लगा रखी थी दोस्तों !
जिसके चर्चे आम थे बाजार में बेवफाई के दोस्तों !!

Intzar ki aaezoo ab kho gai

इंतज़ार की आरज़ू अब खो गयी है !
खामोशियो की आदत हो गयी है !
न सीकवा रहा न शिकायत किसी से अगर है तो !
एक मोहब्बत जो इन तन्हाइयों से हो गई है !!

Dhalta duaa suraz

रोज़ ढलता हुआ सूरज ये कहता है मुझसे आज उसे बेवफा हुए एक दिन और हुआ II