नजर पर शायरी

Wednesday 1st of April 2020

nzar lgi hai zmani ki

न जाने कैसी नज़र लगी है ज़माने की !
अब कोई वजह नही मिलती मुस्कुराने की !!

waqt ke har sitam

मुझे मंज़ूर थे वक़्त के हर सितम मगर !
तुमसे बिछड़ जाना, ये सज़ा कुछ ज्यादा हो गयी !!

tum bhi smajh rhe ho

तुम भी समझ रहे हो हम भी तो समझ रहे हैं !
फिर दिल के सवालो में हम क्यों उलझ रहे हैं !!

rang kitne tumhari mohabbat ke

खुशबु की तरह मेरी हर साँस मैं
प्यार अपना बसने का वादा करो !
रंग जितने तुम्हारी मोहबत के हैं
मेरे दिल में सजाने का वादा करो !!

bhookh lage to ye bacche aansu pe kar

bhookh lage to ye bacche aansu pe kar

भुख लगे तो ये बच्चे आँसु पीकर रह जाते हैं !
हाय गरीबों की मजबुरी ये क्या क्या सह जाते हैं !!

darwaze band ho gae

हर मर्ज़ का इलाज़ मिलता था उस बाज़ार में !
मोहब्बत का नाम लिया, दवाख़ाने बन्द़ हो गये !!

barbaad bastiyo me

बर्बाद बस्तीयों मे किसे ढुंडते हो तुम I
उजडे हुए लोगों के ठिकाने नहीं होते II

apna dard hi bhool gya

किसी ने मुझसे पूछा कि जब तुम्हारा दिल तोङागया !
तो तुम्हे दर्द नही हुआ क्या.मैने हँस के जवाब दिया कि !
तोङने वाला इतना खुश था किमै अपना दर्द ही भूल गया !!

janam dene se inkar kar doo

janam dene se inkar kar doo

यूं ना इम्तेहान ना ले मेरे सब्र का -ए-Bandeye. (इंसान) !
यूं ना हो जाए कि में तुझे अपनी कोख में जन्म देने से ही इनकार कर दूँ !!

usne kaisey naye haath

Usne Kaisey Naye haath

उँगलियाँ आज भी इस सोच में गुम हैं फ़राज़ !
उसने कैसे नए हाथ को थामा होगा !!