नजर पर शायरी

rah na sako kisi ke bina

आँखो से लफ्जो का दीदार मत करना !
खामोशी से मुहब्बत का इजहार मत करना !
रह न सको किसी के बिना !
इतना भी किसी से प्यार न करना !!

mai mar bhi jaau to

मैं मर भी जाऊ, तो उसे ख़बर भी ना होने देना !
मशरूफ़ सा शख्स है, कही उसका वक़्त बर्बाद ना हो जाये !!

samjhata har koi

क़ुछ इसलिये भी नहीं करते हाल ए दिल बयां !
समझता कोई नहीं, समझाता हर कोई !!

jeena muhal kar rakhkha hai

ज़ीना मुहाल कर रखा है,मेरी इन आँखों ने !
खुली हो तो तलाश तेरी,बंद हो तो ख्वाब तेरे !!

tum udas kyu ho

कितना कुछ जानता होगा वो शख्स मेरे बारे में !
मेरे मुस्कुराने पर भी जिसने पूछ लिया की तुम उदास क्यों हो !!

kaisi dillagi thi us bewfa se

टूटे हुए दिल ने भी उसके लिए दुआ मांगी !
मेरी साँसों ने हर पर उसकी ख़ुशी मांगी !
न जाने कैसी दिल्लगी थी उस बेवफा से !
के मैंने आखिरी ख्वाहिश में भी उसकी वफ़ा मांगी !!

dard

बेहद प्यार किया था,बेइंतहा चाहत के साथ !
बेवजह छोड़ दिया उसने,बेइंतहा दर्द के साथ !!

khuda ki bandgi

ख़ुदा की बंदगी शायद अधूरी रह गई !
तभी तो तेरे मेरे दरमियां ये दूरी रह गई !!

ksoor kya tha

पुरी दुनिया से चुरा कर मुझे अपना बनाने वाली!
कसुर क्या था मेरा जो तन्हा छोड़ गयी !!

smajhdar ho gae

कुछ ठोकरों के बाद समझदार हो गये !
अब दिल के मशवरो पर अमल नहीं करते !!