Socha Tha Kabhi

सोचा था कभी हो जाऐगा अहसास मेरे सच्चे प्यार
का मगर ऐसा कोई दिन साल महीना बरस नही आया !
थक कर जिन्दगी से जब मे पहूचा उसकी चोखट
पर माथा टेक मेने बीख मे उसके प्यार की दोलत मागी !
ठूकरा दिया मुझे ठोकर मार कर अपनी चोखट के
बाहर जालिम को मुझ पर थोडा सा भी तरस नही आया !!