naraz kyu hote ho

naraz kyu hote ho

नाराज़ क्यों होते हो चले जाएंगे तुम्हारी ज़िन्दगी से दूर
जरा टूटे दुए दिल के टुकड़े उठा लेने दो
zakhmi dil shayari, टूटे दिल की शायरी