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Mujhey fir tabah kar

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मुझे फिर तबाह कर मुझे फिर रुला जा
सितम करने वाले कहीं से तू आजा

आँखों में तेरी ही सूरत बसी है
तेरी ही तरहा तेरा ग़म भी हंसीं है