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khwab shayari in hindi

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मैंने शाहों की मोहब्बत का भरम तोड़ दिया
मेरे कमरे में भी एक ताजमहल रखा है

basa kar khud ko meri aankhon main chale ho kahan
ye saher ishq hai yahan hijrat ki izazat nahi
बसा कर खुद को मेरी आँखों में चले हो कहाँ
ये सहेर इश्क है यहाँ हिजरत की इजाजत नहीं

isne toda mera dil isse koi shikayat nahi
ye iski amanat hai ise accha laga to humne chod diya
इसने तोडा मेरा दिल इससे कोई शिकायत नहीं
ये इसकी अमानत है इसे अच्छा लगा तो हमने छोड दिया

khwab shayari in hindi