www.poetrytadka.com

Kamiyan to mujhme bhi bahot hain

Last Updated

*कमियाँ तो मुझमें भी बहुत है,*

*पर मैं बेईमान नहीं।*

*मैं सबको अपना मानता हूँ,*

*सोचता फायदा या नुकसान नहीं।*

*एक शौक है अपनी मर्जी से जीने का,*

*कोई और मुझमें गुमान नहीं।*

*छोड़ दूँ बुरे वक़्त में आपनों का साथ,*

*वैसा मैं इंसान नहीं।*

Kamiyan to mujhme bhi bahot hain