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Kabir das ke dohe

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Kabir das ji ke dohe अति का भला न बोलना

अति का भला न बोलना, अति की भली न चूप।
अति का भला न बरसना, अति की भली न धूप।।

अर्थ: न तो अधिक बोलना अच्छा है, न ही जरूरत से ज्यादा चुप रहना ही ठीक है। जैसे बहुत अधिक वर्षा भी अच्छी नहीं और बहुत अधिक धूप भी अच्छी नहीं है।

kabir das ji ke dohe

Kabir das ke dohe निंदक नियरे

निंदक नियरे राखिए, ऑंगन कुटी छवाय,
बिन पानी, साबुन बिना, निर्मल करे सुभाय।

अर्थ: जो हमारी निंदा करता है, उसे अपने अधिकाधिक पास ही रखना चाहिए। वह तो बिना साबुन और पानी के हमारी कमियां बता कर हमारे स्वभाव को साफ़ करता है।

Kabir das ke dohe

कबीरा खड़ा बाज़ार में Kabir Dohe

कबीरा खड़ा बाज़ार में, मांगे सबकी खैर!
ना काहू से दोस्‍ती, न काहू से बैर!!

अर्थ:- इस संसार में आकर कबीर अपने जीवन में बस यही चाहते हैं,
कि सबका भला हो और संसार में यदि किसी से दोस्‍ती नहीं तो दुश्‍मनी भी न हो!

Kabir Dohe

दुःख में सुमिरन सब करे Kabir ke Dohe

दुःख में सुमिरन सब करे सुख में करै न कोय।
जो सुख में सुमिरन करे दुःख काहे को होय ॥

    ।। हिन्दी मे इसके अर्थ ।।
कबीर दास जी कहते हैं कि दुःख के समय सभी भगवान् को याद करते हैं पर सुख में कोई नहीं करता।
यदि सुख में भी भगवान् को याद किया जाए तो दुःख हो ही क्यों !

kabir ke dohe

चिंता से चतुराई घटे Kabir ke dohe in Hindi

चिंता से चतुराई घटे, 
दु:ख से घटे शरीर।
लोभ किये धन घटे, 
कह गये दास कबीर।।

Kabir ke dohe in Hindi