हुस्न शायरी


husn shayari raat hoti hai aankho me

raat hoti hai aankho me

जाने उस शख्स को कैसा हुनर आता है 

रात होते ही आँखों में उतर जाता है 

मै उसके खयालो से बच के कहा जाऊ 

वो मेरी हर सोच के रास्ते पे नज़र आता है 

sundarta husn ka naaz

husn ka naaz

हुस्न का naaz अभी और बढ़ेगा शहर मे यारो

दो आशिकों ने एक ही महबूब को चुन लिया है 

hushn shayari hindi me

naaz na ho

वो हुस्न ही क्या जिसे नाज ना हो..

और वो इश्क ही क्या जिसमें आग ना हो

khubsurti pe shayari zid kagjo ne ki

zid kagjo ne ki

तेरा हुस्न बयां करना मकसद नहीँ था मेरा

ज़िद कागजों ने की थी और कलम चल पड़ी

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hushn shayari  tere husn ko

tere husn ko

तेरे हुस्न को नकाब की जरुरत ही क्या है 

न जाने कौन रहता होगा होश में तुझे देखने के बाद

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